संयुक्त राष्ट्र महासभा ने यूक्रेन में व्यापक, न्यायसंगत और स्थायी शांति तक पहुंचने की आवश्यकता पर एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें रूस से दुश्मनी समाप्त करने और यूक्रेन से अपनी सेना वापस लेने का आह्वान किया गया है। 141 सदस्यों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया जबकि सात सदस्यों ने इसका विरोध किया। भारत सहित 32 सदस्यों ने मतदान में भाग नहीं लिया। 75 से अधिक देशों के विदेश मंत्रियों और राजनयिकों ने बहस के दो दिनों के दौरान महासभा को संबोधित किया, जिसमें कई नेताओ ने यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने वाले प्रस्ताव के समर्थन का आग्रह किया।

 

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत यूक्रेन की स्थिति को लेकर चिंतित है। उन्होंने कहा कि संघर्ष के कारण अनगिनत लोगों की जान चली गई और लाखों लोग बेघर हो गए। सुश्री कंबोज ने कहा कि नागरिक प्रतिष्ठानों पर हमले बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में संघर्ष का एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर हम खुद से कुछ प्रासंगिक प्रश्न पूछें कि क्या हम दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य संभावित समाधान के करीब हैं। क्या कोई ऐसी कोई प्रक्रिया है जिसमें दोनों पक्ष एक विश्वसनीय समाधान के लिए कभी आगे बढ़ सकते हैं। सुश्री कंबोज ने पूछा कि क्या 1945 के विश्व निर्माण पर आधारित संयुक्त राष्ट्र प्रणाली और महासभा को वैश्विक शांति और सुरक्षा के लिए समकालीन चुनौतियों का समाधान करने के लिए अप्रभावी नहीं बनाया गया है।

 

संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत के स्‍थायी प्रतिनिधि ने कहा कि यूक्रेन संघर्ष के प्रति भारत की अवधारणा जनकेंद्रित रहेगी। उन्‍होंने कहा कि भारत, यूक्रेन को मानवीय सहायता और संघर्ष के कारण ग्‍लोबल साउथ के अपने पड़ोसियों को जो खाद्यान, ईंधन और उर्वरक की कीमत बढ़ने से आर्थिक संकट का सामना कर रहा है उन्‍हें आर्थिक समर्थन दे रहा है।

   

संयुक्त राष्ट्र में भारत की स्थायी प्रतिनिधि ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों का पालन करता है और वह हमेशा बातचीत और कूटनीति को ही एकमात्र रास्ता मानता है। (Aabhar Air News)